Atmnirbhar Bharat - आत्मनिर्भर भारत

जैसा कि आप सभी जानते हो दुनियां संरक्षणवाद के तरफ तेजी से बढ़ रही है तो हमें भी इस तरफ ध्यान देना अतिआवश्यक हैं। 1991 के एल. पी. जी. रिफॉर्म के चलते भारत ग्लोबलाइजेशन के तरफ अपना कदम तेजी से बढ़ाया है लेकिन एक बात सोचने वाली है कि अपने देश के उद्योग धंधे तेजी से नष्ट भी हुए ।

आजादी के समय से लगभग नब्बे के दशक तक सबके हाथो में एच एम टी घड़ी और भारत गावों में बसता था तो सबके यहां एटलस साईकिल आज वो दोनो कॉपानिया बन्द हो गई। सरकार अपनी समझ का इस्तेमाल करते हुए आत्मनिर्भर भारत कि संकल्पना प्रस्तुत की है जी कि काफी सराहनीय कदम है। यह संकल्पना ही नहीं इसे हकीकत में बदलना है।

सन् 2008 की मंदी के बाद चीनी अर्थव्यवस्था अपनी व्यापार नीति में बदलाव करके आयात आधारित निर्यात से निर्यात आधारित आयात के तरफ अपने को शिफ्ट कर लिया है। चीन अपने वस्तुओं कि क्वालिटी की गुणवत्ता में काफी सुधार कर अपने देश को ही बाजार बनाने की कोशिश कर रहा है। अब अमेरिका भी पीछे नहीं अब अमेरिका का कहना है पहले अमेरिका बाद में कोई और। ट्रेड वार का सबसे मजबूत करें संरक्षणवाद ही है।

अब भारत भी आत्मनिर्भर भारत के तरफ अपना कदम बढ़ा चुका है। हम जल्द ही एक नया भारत देखेंगे सिर्फ जरूरत है - प्रबंधन, कौशल, और तकनीकी ज्ञान की।बाजार की हमारे यहां कोई कमी नहीं ।

आत्मनिर्भर भारत के लिए किए जाने वाले प्रयास
















उपर्युक्त में हमने भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को दर्शाने की कोशिश करी है। भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी सरकार , राज्य और निजी भागीदारी । भारत पहले भी आत्मनिर्भरता का उदाहरण ग्रीन रेवोल्यूशन के माध्यम से दे चुका है। 2020-2021 का बजट भी आत्मनिर्भर के तरफ एक कदम है।

धन्यवाद!!


0/Post a Comment/Comments

Please read this site and then comments

Stay Conneted